अमित अठवाल
अंबाला कवरेज @ हरियाणा की युवा नेत्री एवं टीम चित्रा संस्थापक चित्रा सरवारा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सामने आई कथित गंभीर विसंगतियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अत्यंत चिंताजनक बताते हुए हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से पूरे मामले की स्वतंत्र, उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि एक ही पते पर असामान्य संख्या में मतदाता दर्ज मिल रहे हैं, रिक्त प्लॉटों और गैर-आवासीय परिसरों के पते पर भी मतदाता प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि निर्वाचन व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसकी तह तक जाना आवश्यक है। चित्रा सरवारा ने कहा कि एसआईआर अभियान के दौरान बी.एल.ओ. के साथ किए गए भौतिक सत्यापन में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिन्होंने अनेक गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 वर्ग गज के एक मकान के पते पर करीब 100 मतदाता दर्ज पाए गए, जबकि मौके पर सत्यापन के दौरान वहां लगभग दो व्यक्ति ही निवास करते मिले। उन्होंने कहा कि यदि वास्तविक निवासियों की संख्या इतनी कम है, तो इतने बड़े पैमाने पर मतदाता प्रविष्टियां किस आधार पर दर्ज हुईं? क्या इन सभी नामों का कभी वास्तविक भौतिक सत्यापन किया गया था अथवा केवल कागजी औपचारिकताओं के आधार पर उन्हें मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया?उन्होंने कहा कि सत्यापन के दौरान ऐसे भी मामले सामने आए, जहां मतदाता सूची में दर्ज पते पर कोई आवास मौजूद ही नहीं था। कहीं रिक्त प्लॉट मिले, तो कहीं गैर-आवासीय परिसर, लेकिन वहां भी मतदाता सूची में नाम दर्ज पाए गए।उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि निर्वाचन व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही मांगने का प्रश्न है। यदि कोई पता वास्तविक आवास नहीं है, तो वहां मतदाता प्रविष्टि कैसे बनी? वेदन के समय क्या दस्तावेज प्रस्तुत किए गए? बी.एल.ओ. की सत्यापन रिपोर्ट में क्या उल्लेख है? और यदि सत्यापन हुआ था तो मौके की वास्तविक स्थिति उससे मेल क्यों नहीं खाती?चित्रा सरवारा ने कहा कि मतदाता सूची कोई साधारण सरकारी अभिलेख नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आधारशिला है। प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए, लेकिन उतना ही आवश्यक यह भी है कि गलत, अप्रमाणित अथवा वास्तविक निवास से असंबंधित प्रविष्टियों की भी निष्पक्ष जांच हो।उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी पात्र मतदाता का अधिकार छीनने की नहीं है, बल्कि केवल इतनी है कि जो वास्तविक और पात्र मतदाता हैं उनका अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहे तथा जिन प्रविष्टियों पर प्रथम दृष्टया संदेह उत्पन्न होता है, उनकी नियमानुसार जांच की जाए।चित्रा सरवारा ने मांग की कि जिन पतों पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मतदाता दर्ज हैं, उन्हें हाई-स्क्रूटनी एड्रेस घोषित कर विशेष जांच की जाए। रिक्त प्लॉटों, खाली मकानों और गैर-आवासीय परिसरों पर दर्ज सभी मतदाताओं का शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन कराया जाए।संबंधित मतदाताओं के फॉर्म-6, अन्य आवेदन पत्र, पता प्रमाण, उपलब्ध दस्तावेज तथा बी.एल.ओ. सत्यापन रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों को नियमानुसार नोटिस जारी कर वास्तविक निवास का पुनः सत्यापन कराया जाए।उन्होंने कहा कि संदिग्ध प्रविष्टियों का पिछले वर्षों की मतदाता सूचियों से तुलनात्मक परीक्षण भी कराया जाना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये नाम कब से सूची में दर्ज हैं। उपलब्ध निर्वाचन अभिलेखों के आधार पर जहां आवश्यक हो, यह भी देखा जाए कि संबंधित मतदाता पूर्व के चुनावों में मतदाता सूची में शामिल थे अथवा नहीं तथा उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उनके मतदान की स्थिति क्या रही।चित्रा सरवारा ने कहा कि यदि जांच में कहीं जानबूझकर गलत सूचना देने, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने अथवा निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से मतदाता पंजीकरण कराने के प्रमाण सामने आते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय कर उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने निर्वाचन आयोग से यह भी मांग की कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मतदाता पंजीकरण प्रणाली में और अधिक कठोर सत्यापन व्यवस्था तथा डाटा आधारित स्क्रूटनी मैकेनिज्म लागू किया जाए, जिससे किसी भी संदिग्ध प्रविष्टि की समय रहते पहचान हो सके।चित्रा सरवारा ने कहा कि लोकतंत्र की निष्पक्षता केवल मतदान के दिन सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि उसकी शुरुआत एक शुद्ध, विश्वसनीय और त्रुटिरहित मतदाता सूची से होती है।यदि एसआईआर जैसी व्यापक प्रक्रिया के दौरान मौके पर ऐसी गंभीर कथित विसंगतियां सामने आ रही हैं, तो उन्हें सामान्य त्रुटि बताकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। प्रत्येक संदिग्ध प्रविष्टि की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, प्रत्येक तथ्य की गहन पड़ताल होनी चाहिए और जहां भी अनियमितता अथवा लापरवाही सिद्ध हो, वहां जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।उन्होंने हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया कि अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र में सामने आए पूरे प्रकरण की समयबद्ध, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराई जाए, जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं तथा यह स्पष्ट किया जाए कि ऐसी असामान्य मतदाता प्रविष्टियां किन परिस्थितियों में बनीं, किस स्तर पर उनका सत्यापन हुआ और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास तभी मजबूत रहेगा जब मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी, तथ्यपरक और संदेह से परे होगी।









