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AMBALA COVERAGE NEWS रक्षाबंधन पर अंबाला के स्कूलों में गूंजेगा सामाजिक संकल्प का संदेश, डीईओ सुधीर कालड़ा ने बीईओ व स्कूल मुखियों को दिए निर्देश सरकारी व गैर-सरकारी सभी विद्यालयों में अगले 10 दिन होंगे प्रेरणादायी कार्यक्रम

अमित अठवाल
अंबाला कवरेज @अंबाला। रक्षाबंधन का पर्व इस बार अंबाला के विद्यालयों में केवल भाई-बहन के प्रेम और राखी के पारंपरिक उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता, संस्कार और सकारात्मक परिवर्तन के संकल्प के रूप में मनाया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी अंबाला सुधीर कालड़ा ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों एवं विद्यालय मुखियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस कर निर्देश दिए हैं कि इस वर्ष सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में रक्षाबंधन पर्व को विशेष रूप से सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए मनाया जाए।
डीईओ ने बैठक में स्पष्ट किया कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखने वाले संस्थान हैं। यदि विद्यार्थी छोटी उम्र से ही नशे, अभद्र भाषा, हिंसा, दुर्व्यवहार/छेड़छाड़ और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का संकल्प लेते हैं तो इसका प्रभाव उनके अपने जीवन के साथ- साथ उनके परिवारों  और पूरे समाज पर भी पड़ेगा।
राखी के साथ लिया जाएगा नशामुक्त और संस्कारवान समाज का संकल्प
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालयों के लिए जारी दिशा-निदेर्शों में कहा गया है कि रक्षाबंधन के अवसर पर विद्यार्थियों को इस पर्व के वास्तविक सामाजिक संदेश से जोड़ा जाए। छात्र-छात्राएं राखी बांधने और बंधवाने के साथ यह संकल्प लें कि वे नशे से सदैव दूर रहेंगे, औरों को नशे की ओर जाने से रोकेंगे तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे। इसके साथ ही विद्यार्थियों को गाली-गलौज एवं अपशब्दों का प्रयोग न करने, दूसरों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने तथा अपने आचरण से विद्यालय एवं परिवार की गरिमा बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
विशेष रूप से बालिकाओं और महिलाओं के सम्मान को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विद्यार्थियों को संदेश दिया जाएगा कि किसी भी लड़की या महिला के साथ दुर्व्यवहार, छेड़छाड़ अथवा अपमानजनक व्यवहार सभ्य समाज में कतई मान्य नहीं है। रक्षाबंधन का अर्थ केवल अपनी ही बहन की रक्षा करना नहीं, बल्कि समाज की प्रत्येक बेटी और महिला के सम्मान एवं सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी निभाना है।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी उठेगी आवाज
विद्यालयों में विद्यार्थियों को ह्यबेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओह्ण का संदेश देते हुए बेटा-बेटी में किसी प्रकार का भेदभाव न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। दहेज प्रथा, बाल विवाह, नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध भी जागरूकता पैदा की जाएगी।
डीईओ सुधीर कालड़ा ने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन में कुछ छोटे-छोटे संकल्पों को दृढ़ता से अपना ले तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ह्लहमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है जो केवल किताबी ज्ञान में आगे न हो, बल्कि संस्कार, संवेदना, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी में भी समाज के लिए उदाहरण बने। विद्यालयों में रक्षाबंधन के अवसर पर आगामी 10 दिनों तक प्रार्थना सभाओं के दौरान संकल्प समारोह, भाषण, संवाद, तथा अन्य जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों के माध्यम से इन संदेशों को उनके घरों और आसपास के समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
हर कलाई पर राखी के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का धागा
डीईओ ने कहा कि राखी का धागा केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमें प्रेम, विश्वास, सुरक्षा, सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश भी देता है। इसी भावना को व्यापक बनाते हुए इस वर्ष अंबाला के विद्यालयों में रक्षाबंधन को सामाजिक संकल्प से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने सभी बीईओ एवं स्कूल मुखियों को निर्देश दिए कि गतिविधियों को महज औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि विद्यार्थियों को इनके पीछे छिपे सामाजिक संदेश को समझाया जाए और उन्हें अपने व्यवहार में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। जिला शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि विद्यालयों से निकलने वाला यह संदेश हर घर तक पहुंचे—नशे, गाली और छेड़छाड़ को ना परंतु बेटियों और महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को हां। इस प्रकार रक्षाबंधन का पर्व एक ऐसे स्वच्छ, स्वस्थ, सुरक्षित, संस्कारवान और समृद्ध समाज के निर्माण का माध्यम बने, जहां प्रत्येक बेटी स्वयं को सुरक्षित और प्रत्येक नागरिक स्वयं को समाज के प्रति जिम्मेदार महसूस करे।
डीईओ सुधीर कालड़ा ने कहा कि रक्षाबंधन पर विद्यार्थियों की कलाई पर बंधने वाली राखी के साथ यदि सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प भी बंध जाए, तो यही इस पवित्र पर्व की सबसे बड़ी सार्थकता होगी।

Ambala Coverage
Author: Ambala Coverage

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