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AMBALA COVERAGE NEWS नगर निगम के सभी 20 वार्डों के लिए गठित वार्ड कमेटियों पर कानूनी संकट, हरियाणा नगर-निकाय नागरिक भागीदारी कानून, 2008 नगर निगमों पर लागू नहीं – हेमंत

अमित अठवाल
अंबाला कवरेज @अंबाला। शहर के सेक्टर 7 ( वार्ड 12) निवासी  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट  एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार  हेमंत कुमार ने आज इस विषय पर एक बार पुन: प्रदेश के  राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री सहित विभाग  के उच्च अधिकारियों,  प्रदेश के एडवोकेट जनरल (ए.जी.), विधि परामर्शी (एल.आर.), अंबाला मंडल आयुक्तजिले के उपायुक्तनगर निगम आयुक्तमेयरअम्बाला शहर और अम्बाला कैंट के  विधायकों तथा अम्बाला लोकसभा सीट से सांसद एवं राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा, सभी 20 वार्डो से निर्वाचित न.नि. सदस्यों और सभी 20 वार्डो से नामित वार्ड समितियों  के सदस्यों को  विस्तृत कानूनी ज्ञापन  भेजकर वार्ड समितियों  के गठन को कानूनी प्रावधानों के विरूद्ध  बताते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है. 

ज्ञापन में दावा किया गया  है कि अम्बाला नगर निगम द्वारा गठित सभी वार्ड कमेटियां पूरी तरह अवैधअधिकार क्षेत्र से बाहर एवं मौजूदा  कानून की दृष्टि में अस्तित्वहीन  हैं।

हेमंत  ने कहा कि 28 जुलाई 2026 को नगर निगम सदन की बैठक में प्रत्येक वार्ड के लिए पांच-छह सिविल सोसाइटी ( सामाजिक प्रतिनिधियों ) वाली वार्ड कमेटियों गठित  की गई, जबकि नगर निगम को ऐसा करने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त ही नहीं है।

2008 का कानून नगर निगमों पर लागू ही नहीं

हेमंत के अनुसार नगर निगम ने वार्ड कमेटियों के गठन का आधार हरियाणा म्युनिसिपल सिटिजन्स पार्टिसिपेशन एक्ट, 2008 को बनाया है, जबकि इस कानून की धारा 2(जी) स्पष्ट रूप से “म्युनिसिपेलिटी (नगर-निकाय)” की परिभाषा केवल हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट, 1973 के अंतर्गत गठित नगर परिषदों और नगर पालिकाओं तक सीमित करती है।

उन्होंने कहा कि अंबाला नगर निगम का गठन हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत हुआ है, इसलिए 2008 का अधिनियम उस पर लागू ही नहीं होता। ऐसे में उक्त कानून के आधार पर वार्ड कमेटियों का गठन पूर्णतः अधिकारविहीन और असंवैधानिक है।

1994 के कानून में भी निगम को नहीं मिला अधिकार

ज्ञापन  में यह भी उल्लेख किया  गया है कि यदि नगर निगमों में वार्ड कमेटियों का गठन किया जाना हो, तो उसका प्रावधान हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 10 में है।

हेमंत  के अनुसार इस धारा में वार्ड कमेटियों के गठन का अधिकार केवल राज्य सरकार को दिया गया है। नगर निगम, महापौर, निगम सदन अथवा नगर आयुक्त को ऐसा कोई अधिकार नहीं सौंपा गया है। इसलिए अंबाला नगर निगम द्वारा स्वयं वार्ड कमेटियां गठित करना कानून के स्पष्ट प्रावधानों का उल्लंघन है।

दो-दो कानूनों का उल्लंघन

हेमंत  ने दावा किया कि यह कार्रवाई दो स्वतंत्र कानूनी आधारों पर अवैध है—

  • पहला, जिस 2008 के अधिनियम का सहारा लिया गया, वह नगर निगमों पर लागू ही नहीं होता।
  • दूसरा, 1994 के नगर निगम अधिनियम के अनुसार भी वार्ड कमेटियां गठित करने का अधिकार केवल राज्य सरकार के पास है, नगर निगम के पास नहीं।

उन्होंने कहा कि किसी भी वैधानिक संस्था को वही अधिकार प्राप्त होते हैं, जो कानून स्पष्ट रूप से प्रदान करता है। कोई भी सार्वजनिक प्राधिकरण (जैसे नगर निगम सदन  स्वयं अपने लिए ऐसे अधिकार नहीं बना सकता) जो विधानसभा  ने उसे दिए ही न हों।

हेमंत ने कहा कि यदि बिना कानूनी अधिकार के गठित इन वार्ड कमेटियों को जारी रहने दिया गया तो यह विधानसभा  द्वारा निर्धारित कानूनी सीमाओं का खुला उल्लंघन होगा. यही  नहीं कानूनी प्रावधानों के विरूद्ध जाकर गठित अम्बाला  नगर निगम की  वार्ड समितियों के गठन को  अदालत में भी चुनौती दी जा सकती है.

 

Ambala Coverage
Author: Ambala Coverage

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