अमित अठवाल
अंबाला कवरेज @ अंबाला। अम्बाला नगर निगम में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर एक बार फिर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के सेक्टर 7 (वार्ड 12) निवासी हाईकोर्ट एडवोकेट एवं नगर निकाय कानून विशेषज्ञ एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 के अनुसार इन दोनों पदों का निर्वाचन बीती 20 जुलाई 2026 तक संपन्न हो जाना चाहिए था, लेकिन आज तक न तो चुनाव कराया गया और न ही इसके लिए नगर निगम सदन की बैठक बुलाई गई। हेमंत के अनुसार, यह स्थिति केवल अम्बाला तक सीमित नहीं है। पंचकूला और सोनीपत नगर निगमों, जिन दोनों के आम चुनाव भी अम्बाला नगर निगम के साथ ही बीते मई महीने में कराये गये थे, में भी यही हाल है, जबकि मार्च 2025 में गठित हरियाणा की आठ नगर निगमों में से मानेसर को छोड़कर शेष सात नगर निगमों में भी करीब 16 माह बाद तक सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का निर्वाचन लंबित पड़ा हुआ है।
नियम में 60 दिन की स्पष्ट समय-सीमा
हेमंत ने बताया कि यद्यपि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 के नियम 71(2) में स्पष्ट प्रावधान है कि नगर निगम के आम चुनाव के बाद मेयर और निर्वाचित सदस्यों के नाम राजपत्र (गजट) में अधिसूचित होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर नगर निगम आयुक्त (कमिश्नर) को 48 घंटे के नोटिस पर सदन की बैठक बुलानी होगी, जिसके एजेंडे में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का निर्वाचन अनिवार्य रूप से शामिल होगा। इस बैठक की अध्यक्षता नगर निगम मेयर करेंगे।
21 मई को हुई अधिसूचना, 20 जुलाई को पूरी हुई समय-सीमा
हेमंत ने बताया कि 10 मई को अम्बाला नगर निगम चुनाव के लिए मतदान और 13 मई को मतगणना हुई थी। इसके बाद 21 मई 2026 को हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकारी गजट में मेयर अक्षिता सैनी तथा नगर निगम के सभी 20 निर्वाचित सदस्यों के निर्वाचन की अधिसूचना प्रकाशित की। इसके एक सप्ताह बाद 28 मई को अम्बाला मंडल के आयुक्त संजीव वर्मा ने मेयर और सभी निर्वाचित सदस्यों को पद एवं निष्ठा की शपथ दिलाई। हेमंत क का कहना है कि चूंकि अधिसूचना 21 मई को प्रकाशित हुई थी, इसलिए नियमों के अनुसार 20 जुलाई 2026 तक सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव संपन्न हो जाना चाहिए था।
बैठक तक नहीं बुलाई, उठे सवाल
उन्होंने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से अम्बाला नगर निगम के आयुक्त वीरेन्द्र सिंह सहरावत ने आज तक इन दोनों पदों के चुनाव के लिए सदन की बैठक तक नहीं बुलाई है, जबकि नियमों के अनुसार यह उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चुनाव में देरी के पीछे कोई प्रशासनिक, राजनीतिक अथवा अन्य कारण हैं, इसकी सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नियमों में दो अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
हेमंत कुमार ने एक और कानूनी विसंगति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि नियम 71(2) में बैठक बुलाने और चुनाव कराने की प्रक्रिया की जिम्मेदारी केवल नगर निगम आयुक्त को दी गई है, जबकि नियम 72, जो मतदान की प्रक्रिया से संबंधित है, उसमें मंडल आयुक्त (डिवीजनल कमिश्नर) का भी उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि एक ही चुनाव प्रक्रिया में दो अलग-अलग अधिकारियों की भूमिका निर्धारित किए जाने का औचित्य स्पष्ट नहीं है और यह नियमों में व्यावहारिक भ्रम पैदा करता है।
पिछली बार दो साल बाद हुआ था चुनाव
उन्होंने याद दिलाया कि दिसंबर 2020 में हुए अम्बाला नगर निगम चुनाव के बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव करीब दो वर्ष बाद दिसंबर 2022 में कराया गया था। उस समय भी चुनाव में असामान्य देरी के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। क्या एक बार फिर निर्वाचन में देरी को लेकर कानूनी चुनौती दी जा सकती है, हेमंत ने बताया कि ऐसी सम्भावना न के बराबर है कि भाजपा के 16 निर्वाचित वार्ड सदस्यों (पार्षदों) में कोई ऐसी हिमाकत करेगा.
गुरुग्राम में हाईकोर्ट के निर्देश भी बेअसर
हेमंत ने बताया कि मार्च 2025 में हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, करनाल, मानेसर, पानीपत, रोहतक और यमुनानगर नगर निगमों के चुनाव हुए थे। इनमें मानेसर नगर निगम को छोड़कर शेष सात नगर निगमों में आज तक सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम नगर निगम में तो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद दोनों पदों के चुनाव अब तक लंबित हैं, जिससे नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं.








